“आज मेरी तो कल तेरी बारी है…” मौलाना बिलाल की नसीहत के बीच 17 वर्षीय मोहम्मद अब्दुल्ला के ईसाल-ए-सवाब की कुरआनख्वानी
कल्याणपुर। मोहम्मद जुबैर

समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत लदौरा पंचायत में 17 वर्षीय मरहूम मोहम्मद अब्दुल्ला के ईसाल-ए-सवाब के लिए उनके वालिद हाफिज मंजूर साहब के आवास पर कुरआनख्वानी और दुआ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम लदौरा मस्जिद के निकट स्थित उनके दरवाजे पर हुआ, जिसमें गांव एवं आसपास के बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
ज्ञात हो कि 20 सितंबर 2026 को हाफिज मंजूर साहब के 17 वर्षीय पुत्र मोहम्मद अब्दुल्ला की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। मरहूम अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। जवान और इकलौते बेटे की अचानक मौत से परिवार सहित पूरे इलाके में गम का माहौल है।
मरहूम के ईसाल-ए-सवाब की गरज से आयोजित कुरआनख्वानी में गांव और आसपास के लोगों ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत की। इसके बाद मरहूम मोहम्मद अब्दुल्ला की मगफिरत, बुलंद दर्जात और परिवार के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ की गई।
कार्यक्रम में समस्तीपुर जामा मस्जिद के हजरत मौलाना हाफिज बिलाल अहमद निजामी साहब, हाफिज एहसान साहब, मौलाना काजिम राजा चतुर्वेदी, लदौरा के कारी अबरार साहब सहित क्षेत्र के कई उलेमा, सामाजिक लोग और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। स्थानीय पत्रकार मोहम्मद जुबेर समेत दर्जनों लोगों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।
कार्यक्रम के दौरान नातख्वानी भी की गई। माहौल पूरी तरह गमगीन और रूहानी रहा। लोगों ने मरहूम मोहम्मद अब्दुल्ला के लिए दुआ-ए-मगफिरत की और उनके वालिद हाफिज मंजूर साहब समेत पूरे परिवार को इस सदमे को सहने की ताकत देने की दुआ की।
इस मौके पर मौलाना हाफिज बिलाल अहमद निजामी साहब ने लोगों को संबोधित करते हुए जिंदगी और मौत की हकीकत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा, “मौत से किसकी रिश्तेदारी है, आज मेरी तो कल तेरी बारी है।” उन्होंने लोगों को मौत से गाफिल न रहने और अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने की नसीहत की।
कार्यक्रम के अंत में मौलाना हाफिज बिलाल अहमद निजामी साहब की दुआ पर कुरआनख्वानी और ईसाल-ए-सवाब का कार्यक्रम संपन्न हुआ। दुआ के दौरान मरहूम मोहम्मद अब्दुल्ला की मगफिरत, दर्जात की बुलंदी और उनके वालिद हाफिज मंजूर साहब समेत पूरे परिवार के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ की गई।
अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद अब्दुल्ला की मगफिरत फरमाए, उनके दर्जात बुलंद फरमाए और तमाम परिजनों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।
