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इस्लाम में हाफ़िज़-ए-क़ुरान की फ़ज़ीलत बहुत बुलंद: कारी इम्तियाज़ रज़ा क़ादरी
हाजीपुर / महनार, वैशाली | रिपोर्ट: नदीम अशरफ़
मदरसा दारुल उलूम फ़ैज़ान खाकी, महनार (वैशाली) में चार बच्चों के क़ुरान-ए-करीम हिफ़्ज़ (याद) शुरू करने के मौके पर एक दुआइया कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मदरसा के मुहतमिम हज़रत हाफ़िज़ व कारी मोहम्मद इम्तियाज़ रज़ा क़ादरी खाकी ने कहा कि इस्लाम में हाफ़िज़-ए-क़ुरान की फ़ज़ीलत बहुत बुलंद है, क्योंकि वह अल्लाह के कलाम का हाफ़िज़ और अमानतदार होता है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि हदीस शरीफ़ के मुताबिक, हाफ़िज़-ए-क़ुरान क़यामत के दिन अपने घर के 10 लोगों की शफ़ाअत करेगा, जन्नत में ऊँचे दर्जे हासिल करेगा और दुनिया में भी इमामत के लिए सबसे ज़्यादा हक़दार माना जाता है। क़यामत के दिन हाफ़िज़ से कहा जाएगा, “क़ुरान पढ़ता जा और जन्नत के दर्जों पर चढ़ता जा, क्योंकि तेरी मंज़िल वहीं होगी जहाँ आख़िरी आयत खत्म होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि एक बा-अमल हाफ़िज़ अपने घराने के दस ऐसे लोगों की सिफ़ारिश करेगा, जिन पर जहन्नम वाजिब हो चुकी होगी। नबी करीम ﷺ का फरमान है: “तुम में सबसे बेहतरीन शख्स वह है जो क़ुरान सीखे और सिखाए।”
इस मौके पर बच्चों को हिफ़्ज़-ए-क़ुरान शुरू कराने की अहमियत पर जोर देते हुए कहा गया कि हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपने घर के कम से कम एक बच्चे को हाफ़िज़-ए-क़ुरान बनाए।
हिफ़्ज़ शुरू करने वाले बच्चे:
मोहम्मद ताज बिन मोहम्मद जमालुद्दीन (पंडौल बुज़ुर्ग, सीतामढ़ी)
मोहम्मद शहाबुद्दीन बिन मोहम्मद सलाहुद्दीन (पंडौल बुज़ुर्ग, सीतामढ़ी)
मोहम्मद राशिद बिन मोहम्मद सलीम रब्बानी (महनार, वैशाली)
मोहम्मद शहादत बिन मोहम्मद असलम (पंडौल बुज़ुर्ग, सीतामढ़ी)
कार्यक्रम में नाज़िम-ए-आला मौलाना मोहम्मद नियाज़ रज़ा खाकी की निगरानी में और मौलाना मोहम्मद आक़िल रिज़वी द्वारा बच्चों को बेहतर तालीम व तरबियत दी जा रही है।

