October 12, 2026
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एआईसीटीई वाणी-2026 के तहत डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

मैथिली भाषा में बिहार की कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं और बाढ़ प्रबंधन में एआई के इस्तेमाल पर हुआ मंथन

हाजीपुर/अब्दुल वाहिद। डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, वैशाली के पटना साहिब टेक्निकल कैंपस में एआईसीटीई वाणी-2026 के तहत 25 और 26 सितंबर को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मैथिली भाषा को प्राथमिकता देते हुए आयोजित इस कार्यशाला का विषय ‘बिहार में कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं और बाढ़ प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट सूचना प्रणाली’ था।

स्थानीय समस्याओं के समाधान में एआई की संभावनाओं पर चर्चा

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट सूचना प्रणाली के माध्यम से बिहार की स्थानीय जरूरतों और चुनौतियों के समाधान की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। कृषि, स्वास्थ्य और बाढ़ प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।

आईआईटी पटना समेत विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ हुए शामिल

कार्यशाला में आईआईटी पटना के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार झा, डीसीएसटी पटना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. अनंत कुमार, कृषि विश्वविद्यालय पूसा की डॉ. नम्रा, आईआईटी पटना के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रंजीत कुमार झा, रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) बृजेश सिंह, डीन साइंस डॉ. सुशील जमरियार तथा वाणी कोऑर्डिनेटर प्रो. (डॉ.) धर्मेंद्र कुमार सिंह ने विभिन्न सत्रों में व्याख्यान दिए।

‘डीप लर्निंग से एलएलएम और एजेंटिक एआई’ पर विशेष सत्र

डॉ. रंजीत कुमार झा का ‘Deep Learning from Foundation to LLM and Agentic AI’ विषय पर व्याख्यान विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने डीप लर्निंग के मूल सिद्धांतों से लेकर एलएलएम और एजेंटिक एआई तक के तकनीकी विकास को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया।

मैथिली में तकनीकी चर्चा को बताया महत्वपूर्ण पहल

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) बृजेश सिंह ने कहा कि मैथिली जैसी समृद्ध भारतीय भाषा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों पर चर्चा तकनीकी ज्ञान को अधिक सहज और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं और बाढ़ प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एआई और स्मार्ट सूचना प्रणालियों का उपयोग बिहार के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।

वहीं, वाणी कोऑर्डिनेटर प्रो. (डॉ.) धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य आधुनिक तकनीकी ज्ञान को भारतीय भाषा के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाना और उसे स्थानीय जरूरतों से जोड़ना है। मैथिली में तकनीकी विमर्श इसी दिशा में एक सार्थक पहल है।

तकनीकी आदान-प्रदान के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम की शुरुआत आशुतोष कुमार सिंह के स्वागत भाषण से हुई। कार्यशाला के दोनों दिनों में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच तकनीकी विषयों पर विचार-विमर्श एवं ज्ञान का आदान-प्रदान जारी रहा।

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