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राष्ट्र के प्रति समर्पित था डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन : राज्यपाल
विश्व हिंदी परिषद के क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने पर जोर
पटना, 29 अगस्त 2026। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय एकता की भावना से प्रेरित रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं और समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राज्यपाल शनिवार को लोकभवन में विश्व हिंदी परिषद द्वारा आयोजित क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन एवं सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंद्रेश कुमार ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का चिंतन भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक आत्मबोध से जुड़ा था। हिंदी सहित भारतीय भाषाएं देश की विविधता को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और जनभावनाओं से जुड़ी भाषा है। विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने डॉ. मुखर्जी के शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचारों पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपक ठाकुर ने भारतीय भाषाओं के बीच संवाद के माध्यम के रूप में हिंदी की भूमिका पर जोर दिया।
इस अवसर पर पद्मश्री शांतमनु जी तथा चुनाव आयुक्त, जम्मू-कश्मीर की मौजूदगी में रमाकांत चंदन की पुस्तक ‘लाल पहाड़ी : स्त्री महाविहार’ का विमोचन किया गया। वक्ताओं ने बताया कि लाल पहाड़ी गंगा घाटी का उद्घाटित पहला स्त्री महाविहार माना जाता है, जहां विशिष्ट बौद्ध भिक्षुणियों के रहने के प्रमाण मिले हैं।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी ठाकुर, डॉ. संजय पासवान, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विंसी कुमार, एमएलसी सूर्य कुमार शर्मा, शैलेश वत्स, कमल किशोर, प्रो. मधु प्रभा सहित परिषद के पदाधिकारी, साहित्यकार, शोधार्थी एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

