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“समस्तीपुर : चकमेहसी स्कूल की पोल खुली: नामांकन में भेदभाव-वसूली के आरोप, पत्रकारों को बाहर किया—अब दो शिफ्ट का आदेश”
समस्तीपुर (कल्याणपुर) | जिला संवाददाता: मोहम्मद जुबैर | 23 अप्रैल 2026
जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत चकमेहसी पंचायत स्थित उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय चकमेहसी इन दिनों दो अलग-अलग कारणों से चर्चा में है। एक तरफ जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्कूल को दो शिफ्ट में चलाने का आदेश जारी किया गया है, वहीं दूसरी ओर कक्षा 9 वीं में नामांकन के दौरान भेदभाव, अव्यवस्था और वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
जारी आदेश के अनुसार अब कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित की जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य भीड़भाड़ कम कर छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना बताया गया है।
हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। स्थानीय छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि नामांकन प्रक्रिया में उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। कई छात्रों को नाम में मामूली त्रुटि या “MD” (मोहम्मद) लिखे होने के कारण बार-बार स्कूल का चक्कर लगाने को मजबूर किया जा रहा है।
इसके साथ ही कुछ शिक्षकों पर नामांकन के नाम पर पैसे मांगने के आरोप भी लगे हैं। छात्रों का कहना है कि बिना पैसे दिए नामांकन में अड़चनें पैदा की जा रही हैं।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका पर भी गंभीर आरोप लगे हैं कि वे उक्त मामले की स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बात तक नहीं सुन रही हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें यह तक कहा जा रहा है कि “ऊपर तक पहुंच है, जो होगा वही होगा।”
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि, पूर्व मुखिया खुशबू आफरीन, युवा नेता जकी अहमद आरजू और पत्रकारों ने आवाज उठाई, जिसके बाद दो शिफ्ट में स्कूल चलाने का आदेश जारी हुआ।
लेकिन इसी बीच एक और गंभीर आरोप सामने आया है कि पत्रकारों को विद्यालय में प्रवेश कर रिपोर्टिंग करने से रोका गया। पत्रकारों का कहना है कि जब वे मिड-डे मील और छात्रों की स्थिति की रिपोर्टिंग करने पहुंचे, तो उन्हें “बाहर जाइए” कहकर स्कूल परिसर से बाहर कर दिया गया।
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि नाम में छोटी त्रुटि होने पर भी नामांकन किया जा सकता है और बाद में सुधार कराया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल इस मामले की कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन मामला गंभीर है और जांच की जाएगी।
अब सवाल यह उठता है कि जहां एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए आदेश जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर छात्रों के साथ भेदभाव और अनियमितता के आरोप क्यों लग रहे हैं? आखिर गरीब छात्र-छात्राएं अपनी फरियाद लेकर कहां जाएं?

