October 12, 2026
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बंजार टोला के बच्चों को आंगनबाड़ी से दूर रखने की शिकायत, सीडीपीओ ने तत्काल जांच के दिए आदेश

शिकायत मिलते ही हरकत में आया विभाग, सेविका ने बस्ती पहुंचकर बच्चों व गर्भवती महिलाओं के नाम किए दर्ज

कल्याणपुर, 5 अक्टूबर। संवाददाता जावेद अशरफ

समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत चकमेसी पंचायत के वार्ड संख्या-3 स्थित बंजार टोला में आंगनबाड़ी की सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों की शिकायत ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बस्ती में रहने वाले छह वर्ष से कम उम्र के कई बच्चों को अब तक आंगनबाड़ी केंद्र से नहीं जोड़ा गया था और बच्चों को केंद्र तक लाने के लिए सेविका-सहायिका द्वारा नियमित रूप से बस्ती में संपर्क नहीं किया जाता था।

बताया जाता है कि बंजार टोला में करीब दस घरों में बंजारा समुदाय के परिवार लंबे समय से रह रहे हैं। बस्ती में छोटे बच्चों के साथ गर्भवती महिलाएं भी हैं। ग्रामीणों ने जब इस मामले की जानकारी सीडीपीओ को फोन पर दी तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थल जांच का आदेश दिया।

सीडीपीओ के निर्देश के बाद आंगनबाड़ी सेविका बंजार टोला पहुंचीं और पात्र बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। गर्भवती महिलाओं में प्रवीण खातून, पति मोहम्मद अबु लैस तथा तबस्सुम खातून, पति मोहम्मद इरफान का नाम दर्ज किया गया। वहीं बच्चों में जोया खातून, शिफान समेत अन्य बच्चों के नाम भी आंगनबाड़ी केंद्र से जोड़े गए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायत नहीं की जाती तो बस्ती के कई बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधाओं से वंचित रह जाते। लोगों ने मांग की है कि क्षेत्र की सभी बस्तियों और टोलों का नियमित सर्वे कर पात्र बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाए।

सीडीपीओ ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास जहां भी इस तरह की शिकायत सामने आएगी, वहां जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आज प्राप्त शिकायत के आधार पर भी तत्काल जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि पात्र लाभुक किसी भी सरकारी सुविधा से वंचित न रहें।

शिकायत के बाद हुई कार्रवाई से बंजार टोला के लोगों में उम्मीद जगी है कि अब उनके बच्चों को भी आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधाएं नियमित रूप से मिल सकेंगी। हालांकि, ग्रामीणों की शिकायत ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या विभागीय स्तर पर बस्तियों का नियमित सर्वे और लाभुकों की पहचान सही तरीके से हो रही है?

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