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12वी शरीफ को शांति दिवस के रूप में मनाएं, समाज में अमन और भाईचारे का संदेश पहुंचाएं : मौलाना मसूद
चकमेहसी पंचायत वार्ड संख्या-3 के धर्म प्रचारक ने लोगों से पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को जीवन में उतारने और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की
कल्याणपुर/समस्तीपुर, 24 अगस्त 2026। जिला संवाददाता मोहम्मद जुबेर।

कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत चकमेहसी पंचायत के वार्ड संख्या-3 में धर्म प्रचारक मौलाना मोहम्मद मसूद आलम कादरी ने 12 रबी उल औव्वल शरीफ को शांति, अमन, भाईचारे और मानवता के संदेश के साथ मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 26 अगस्त 2026 को 12 वी शरीफ मनाई जाएगी, जो इस्लामी जगत में महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस अवसर पर लोगों को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी, उनकी शिक्षाओं और मानवता के प्रति उनके संदेश को याद करते हुए समाज में शांति और सद्भाव स्थापित करने का संकल्प लेना चाहिए।
मौलाना मोहम्मद मसूद आलम कादरी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूरी मानवता को प्रेम, भाईचारे, इंसाफ, रहमदिली और शांति का संदेश दिया। उन्होंने अत्याचार, अन्याय, भेदभाव और अपराध के खिलाफ लोगों को जागरूक किया तथा कमजोरों, गरीबों और जरूरतमंदों के साथ सहानुभूति और इंसाफ का व्यवहार करने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि हुजूर की जिंदगी पूरी मानवता के लिए एक आदर्श है और उनकी शिक्षाओं को केवल सुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में भी उतारना चाहिए।
मौलाना मसूद ने कहा कि आज समाज में नफरत, आपसी दुश्मनी, भेदभाव, हिंसा और अपराध जैसी समस्याएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। ऐसे समय में पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं और उनके बताए हुए अमन व भाईचारे के रास्ते को अपनाने की जरूरत और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि 12 शरीफ के मौके पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने आसपास के लोगों के साथ प्रेम और सद्भाव का व्यवहार करेंगे, किसी के साथ जाति, धर्म, भाषा या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे तथा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएंगे।
उन्होंने कहा कि किसी भूखे को भोजन कराना, गरीब की मदद करना, परेशान व्यक्ति का सहारा बनना और जरूरतमंद के काम आना ही सच्ची मानवता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि 12 वी शरीफ के अवसर पर दिखावे और अनावश्यक खर्च से बचते हुए समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सहायता को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर मानवता और भाईचारे की भावना के साथ काम करे तो समाज से नफरत और दुश्मनी को काफी हद तक खत्म किया जा सकता है।
मौलाना मसूद आलम कादरी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने इंसाफ और मानव समानता का संदेश दिया। उनके संदेश में किसी व्यक्ति के साथ अन्याय करने की कोई जगह नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अपने पड़ोसियों के अधिकारों का सम्मान करें, बुजुर्गों का आदर करें, बच्चों के साथ प्यार से पेश आएं और गरीबों एवं बेसहारा लोगों की मदद करें। उन्होंने कहा कि समाज में अमन कायम रखना केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे पैगंबर-ए-इस्लाम की जिंदगी और उनके आदर्शों को समझें तथा अपने चरित्र और व्यवहार में अच्छे गुणों को अपनाएं। युवाओं को नशा, अपराध, हिंसा और गलत संगत से दूर रहकर शिक्षा, मेहनत और समाजसेवा की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मजबूत चरित्र और अच्छी सोच वाला युवा ही परिवार, समाज और देश को बेहतर दिशा दे सकता है।
मौलाना मसूद ने कहा कि 12 शरीफ का संदेश केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानियत, प्रेम, शांति और आपसी सम्मान का संदेश है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस अवसर पर समाज में आपसी सौहार्द बनाए रखें और किसी भी प्रकार की अफवाह, विवाद या तनाव को बढ़ावा न दें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों और समुदायों के लोगों का सम्मान करना तथा एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ा होना ही मजबूत और शांतिपूर्ण समाज की पहचान है।
उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर हमें अपने समाज में ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां कोई व्यक्ति खुद को अकेला या असहाय महसूस न करे। गरीब, विधवा, अनाथ, बुजुर्ग और जरूरतमंद परिवारों की मदद करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से 12 शरीफ के मौके पर अधिक से अधिक नेक कार्य करने, जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज में अमन व भाईचारे को मजबूत करने की अपील की।
मौलाना मोहम्मद मसूद आलम कादरी ने अंत में कहा कि 12 शरीफ को शांति दिवस के रूप में मनाते हुए हमें पैगंबर-ए-इस्लाम के बताए हुए प्रेम, इंसाफ, रहमदिली और मानवता के रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब समाज में एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होगी, तभी नफरत, दुश्मनी और अपराध को कम किया जा सकेगा। उन्होंने क्षेत्र के तमाम लोगों से शांतिपूर्ण वातावरण में 12 शरीफ मनाने और पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
