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मुंबई के कुर्ला में ‘दारुल उलूम महबूब-ए-सुबहानी’ बना इंसानियत की मिसाल — 1400 से ज्यादा बच्चों को मुफ्त तालीम, रहन-सहन और इलाज, समाज के सहयोग से चल रहा बड़ा सिस्टम


मुंबई (कुर्ला) | मोहम्मद जुबैर की रिपोर्ट


मुंबई के कुर्ला वेस्ट स्थित दारुल उलूम महबूब-ए-सुबहानी आज के दौर में एक ऐसी बेहतरीन मिसाल बनकर सामने आया है, जहां गरीब, यतीम और असहाय बच्चों को न सिर्फ दीनी बल्कि दुनियावी तालीम के साथ-साथ रहने, खाने और मुफ्त इलाज की भी पूरी सुविधा दी जा रही है। यह मदरसा समाज के सहयोग, सदका, खैरात और इमदाद के जरिए संचालित हो रहा है और जरूरतमंद बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है।
मदरसे के प्रिंसिपल सैयद मोहम्मद इकरामुल हक साहब ने बताया कि इस्लाम में इल्म की बहुत अहमियत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही इंसान को तहजीब, ईमानदारी और बड़ों का सम्मान सिखाती है और समाज की बुराइयों को खत्म करने में अहम भूमिका निभाती है। मदरसे में दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा, टेक्निकल और सर्टिफिकेट कोर्स भी कराए जाते हैं, ताकि बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बन सके।
हाल ही में मोहम्मद शमीम सेठ मदरसे का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने यहां की व्यवस्था को देखकर हैरानी जताई और कहा कि “आज के दौर में जहां बड़े-बड़े घरों में बच्चों को ऐसी सुविधाएं नहीं मिलतीं, वहीं इस मदरसे में बच्चों को बेहतर खाना, रहन-सहन और तालीम दी जा रही है, जो काबिले-तारीफ है।” उन्होंने यह भी कहा कि भले ही बच्चों की संख्या कम नजर आई, लेकिन व्यवस्था बेहद शानदार और संतोषजनक है।
मदरसे के स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार, पहले यहां 500 से अधिक बच्चे हॉस्टल में रहकर तालीम हासिल करते थे, लेकिन इस साल कुछ परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई (खासकर गैस की कीमतों में इजाफा) के कारण बच्चों की संख्या में कटौती करनी पड़ी है।
फिलहाल, प्राइमरी सेक्शन में करीब 1300 से 1400 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि मदरसे में लगभग 60 शिक्षक (उस्ताद) बच्चों को तालीम देने में लगे हुए हैं।
इतने बड़े स्तर पर मदरसे को चलाना आसान नहीं है। बच्चों के खाने-पीने, रहने, इलाज और शिक्षकों की तनख्वाह पर भारी खर्च आता है। इसके बावजूद यह पूरा सिस्टम समाज के लोगों के सहयोग से सुचारू रूप से चल रहा है और आगे भी इसी तरह चलता रहेगा।
इस मौके पर हजरत मुफ्ती फिरोज अहमद अलीमी, मुफ्ती ताहिर हुसैन मिस्बाही, मुफ्ती वसीम अहमद कादरी मिस्बाही, हाजी कलीमुल्लाह (सेक्रेटरी) समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
यह मदरसा,आला हजरत इमाम अहमद रजा चौक, न्यू मिल रोड, कुर्ला वेस्ट, मुंबई में स्थित है, जहां बच्चे 24 घंटे उस्तादों की निगरानी में रहकर तालीम हासिल कर रहे हैं। बच्चों ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें यहां बेहतर शिक्षा, अच्छा खाना और सुरक्षित माहौल मिल रहा है।

दारुल उलूम महबूब-ए-सुबहानी सिर्फ एक मदरसा नहीं, बल्कि इंसानियत, शिक्षा और सामाजिक सहयोग की एक मजबूत मिसाल है, जहां हर दिन सैकड़ों- बच्चों का भविष्य संवारा जा रहा है।

By hgka

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