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जुम्मा-तुल-विदा पर उमड़ा आस्था का सैलाब, मस्जिदों में गूंज उठीं दुआएं
संवाददाता: मोहम्मद ज़ुबैर | समस्तीपुर
समस्तीपुर जिले में रमजान मुबारक के आखिरी जुमा, जिसे आमतौर पर जुम्मा-तुल-विदा कहा जाता है, के मौके पर पूरे जिले में अकीदत और इबादत का खास माहौल देखने को मिला। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर तरफ अल्लाह की इबादत, तिलावत-ए-कुरआन और दुआओं की गूंज सुनाई दी।
शहर के गोला रोड स्थित मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए सुबह से ही अकीदतमंदों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। नमाज के वक्त मस्जिद परिसर और आसपास के इलाके नमाजियों से खचाखच भर गए। लोगों ने बड़े ही अदब और एहतराम के साथ नमाज अदा कर अपने गुनाहों की माफी मांगी और देश में अमन-चैन, भाईचारा और खुशहाली के लिए खास दुआएं कीं।
🌙 रमजान का पैगाम: इंसानियत और मदद का जज़्बा
वहीं समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत चकमेहसी पंचायत स्थित ऐतिहासिक रजा नूरी जामा मस्जिद में भी जुम्मा-तुल-विदा की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। इस मौके पर धर्मगुरु हजरत अल्लामा मौलाना हाफिज व क़ारी मसूद क़ादरि साहब भागलपुरी ने खुत्बा (भाषण) देते हुए रमजान के असली पैगाम पर विस्तार से रोशनी डाली।
उन्होंने कहा कि रमजान सिर्फ रोजा रखने का नाम नहीं, बल्कि यह सब्र, तकवा, इंसानियत और आपसी भाईचारे का महीना है। यह महीना हमें सिखाता है कि हम अपने से छोटे और कमजोर लोगों पर रहम करें, बड़ों का सम्मान करें और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे रहें।
💰 जकात पर दिया खास संदेश
मौलाना साहब ने जकात के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जकात देना हर साहिबे-निसाब मुसलमान पर फर्ज है। उन्होंने कहा कि जकात का असली मकसद सिर्फ किसी के आने पर पैसा दे देना नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों को तलाश कर उनकी मदद करना है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई गरीब या जरूरतमंद असहाये निर्बल हमारे दरवाजे पर मदद मांगने आता है, तो वह हम पर एहसान करता है, क्योंकि वह हमें नेक काम करने का मौका देता है। इसलिए हमें खुद पहल करते हुए समाज के गरीब, असहाय और कमजोर तबके तक अपनी मदद पहुंचानी चाहिए।
🤲 देश में अमन-चैन के लिए दुआ
जुम्मा-तुल-विदा की नमाज के दौरान नमाजियों ने खास तौर पर देश में शांति, भाईचारा और तरक्की के लिए दुआएं मांगीं। साथ ही अपने परिवार, समाज और पूरी उम्मत की खुशहाली के लिए भी अल्लाह से दुआ की गई।
🌙 ईद की दी मुबारकबाद
अपने खुत्बे के अंत में मौलाना हाफिज व कारी मसूद क़ादरी साहब ने सभी देशवासियों और इलाके के लोगों को आने वाली ईद-उल-फितर की दिली मुबारकबाद दी और अपील की कि ईद को आपसी भाईचारे, मोहब्बत और खुशियों के साथ मनाएं।
👥 ये लोग रहे मौजूद
इस मौके पर हाफिज मोहम्मद अजमल, मोहम्मद मुकीम (सेक्रेटरी), मोहम्मद मुबीन, मोहम्मद जुम्मन समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


