
पत्रकारिता की साख पर संकट: फेक न्यूज़ और फर्जी पहचान पर प्रशासन सख्त, समस्तीपुर में कार्रवाई के संकेत
समस्तीपुर | संवाददाता: मोहम्मद जुबेर 03/04/2026
समस्तीपुर जिले में पत्रकारिता की विश्वसनीयता और गरिमा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और बिना सत्यापन के खबरों के प्रसार ने न केवल पत्रकारिता की साख को प्रभावित किया है, बल्कि प्रशासन के सामने भी नई चुनौती खड़ी कर दी है।
जिले में इन दिनों यह देखा जा रहा है कि कई ऐसे लोग भी खुद को पत्रकार बताकर थानों और सरकारी कार्यालयों से जानकारी एकत्र कर रहे हैं, जिनके पास न तो किसी मान्यता प्राप्त संस्थान का प्रमाण है और न ही वैध प्रेस पहचान पत्र। इसके अलावा, Facebook, YouTube जैसे प्लेटफॉर्म पर बिना पुष्टि के खबरें वायरल करना आम बात होती जा रही है।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए समस्तीपुर एसपी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि फेक न्यूज़ फैलाने और बिना प्रमाणिकता के खबर चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक और अपुष्ट खबरें फैलाने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बना रहे।
वहीं, इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) श्री दिलीप कुमार ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि
“केवल वही व्यक्ति पत्रकारिता के कार्य के लिए अधिकृत माने जाएंगे, जिनके पास वैध प्रेस कार्ड, संबंधित संस्थान का प्राधिकृत पत्र, डीपीआरओ (जिला जनसंपर्क कार्यालय) या डीपीआईओ/सूचना विभाग से जारी मान्यता हो। इसके बिना कोई भी व्यक्ति पत्रकार के रूप में सरकारी कार्यालय या थाना परिसर में प्रवेश कर सूचना संकलन नहीं कर सकता।”
एसडीएम ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति बिना वैध पहचान और अनुमति के खुद को पत्रकार बताकर खबरों का संकलन या प्रसारण करता है, तो उसके खिलाफ विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
जिले के कई जिम्मेदार पत्रकारों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वे सभी नियमों का पालन करते हुए पत्रकारिता कर रहे हैं, लेकिन फर्जी पहचान वाले लोगों की वजह से उनकी छवि भी प्रभावित हो रही है।
हाल के दिनों में कुछ संवेदनशील घटनाओं की तस्वीरें और खबरें बिना सत्यापन के सोशल मीडिया पर वायरल की गईं, जिससे न केवल संबंधित लोगों की गरिमा को ठेस पहुंची, बल्कि अफवाह फैलने की स्थिति भी बनी।
पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि पत्रकारिता एक जिम्मेदार पेशा है, जिसमें तथ्यों की पुष्टि और नैतिकता का पालन बेहद जरूरी है। ऐसे में प्रशासन द्वारा सख्ती बरतना समय की मांग है।
अब देखना यह होगा कि समस्तीपुर प्रशासन इस दिशा में कितनी तेजी और प्रभावशीलता से कार्रवाई करता है और पत्रकारिता की साख को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
