August 28, 2026
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समस्तीपुर : वैज्ञानिक तकनीक से करें धान की खेती, बढ़ेगी पैदावार और आमदनी : कृषि वैज्ञानिक
समस्तीपुर : धान की खेती में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर बिहार के किसान बेहतर उत्पादन के साथ अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं। यह जानकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली की फसल विशेषज्ञ भारती उपाध्याय ने किसानों को दी।
उन्होंने बताया कि धान उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु की प्रमुख फसल है, जिसकी अच्छी पैदावार के लिए अधिक तापमान, पर्याप्त आर्द्रता, अच्छी वर्षा तथा उचित जल निकास वाली भारी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
उन्होंने कहा कि जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है, वे बिना विलंब वैज्ञानिक तरीके से रोपाई शुरू करें। जिन किसानों ने अभी तक नर्सरी तैयार नहीं की है, वे बिचड़ा खरीदकर रोपाई कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि धान की नर्सरी तैयार करने का उपयुक्त समय 12 मई से 31 मई तक होता है, जो अब समाप्त हो चुका है।
फसल विशेषज्ञ ने किसानों को उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक मात्रा में उपयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि सही मात्रा में उर्वरक का प्रयोग करने से धान की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। साथ ही उन्होंने खेतों में खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि रोपाई के बाद कम से कम 40 दिनों तक खेत को खरपतवारों से मुक्त रखना चाहिए। इसके लिए किसान यांत्रिक विधि से निकाई-गुड़ाई करें, जो सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका है।
भारती उपाध्याय ने धान की सीधी बुआई (डायरेक्ट सीडिंग) तकनीक को भी किसानों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक में नर्सरी तैयार करने और रोपाई की आवश्यकता नहीं होती, जिससे श्रम, समय, पानी और ईंधन की बचत होती है। साथ ही कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर धान की खेती को अधिक लाभदायक बनाने की अपील की।

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